कहीं भी जीवन अपनी गुज़ार सकता… Ghazal

ghazal

कहीं भी जीवन अपनी गुज़ार सकता था
वह चाहता तो जानबूझ कर हार सकता था

पृथ्वी पैर मेरे लिपट गई अन्यथा
आकाश से तारे उतार सकता था

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मेरे मकान में दीवार न दरवाजा
मुझे तो कोई घर से पुकार सकता था

जला रही हैं जिसे तेज धूप की नजरें
वह बादल उद्यान किस्मत संवार सकता था

संतुष्टि थीं इस की रफ़ाकतें बलराज
वह आईने में मुझे भी उतार सकता था

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बलराज दी
संपर्क: – ईदगाह रोडाधम जयपुर (जम्मू)
मोबाइल नंबर: -9419339303

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