Supporters also took to streets
- पीएम के फैसले का खुलकर विरोध कर रहे ज्वैलर्स
- सर्राफा बाजार में घबराहट, बंगाली कारीगरों पर सबसे बड़ी मार
देहरादून। Supporters also took to streets सोने पर आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सोना खरीद को लेकर दिए गए संदेश के बाद सर्राफा कारोबारियों में हलचल मच गई है। जो व्यापारी कल तक प्रधानमंत्री मोदी के प्रबल समर्थक माने जाते थे, वही अब इस फैसले के विरोध में सड़कों पर उतरने लगे हैं। उत्तराखण्ड समेत देशभर के सर्राफा बाजारों में नाराजगी खुलकर सामने आ रही है।
उत्तराखण्ड के हरिद्वार, लक्सर, रूड़की, हल्द्वानी, रूद्रपुर, नैनीताल, देहरादून, डोईवाला व विकासनगर समेत कई शहरों में सर्राफा व्यापारी संगठनों ने सांकेतिक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिये हैं, व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
वहीं, उत्तराखण्ड के ज्वैलरी प्रतिष्ठानों में बड़ी संख्या में पश्चिम बंगाल के कारीगर काम करते हैं। सोने को खूबसूरत आभूषणों में ढालने वाले यही कारीगर अब सबसे ज्यादा चिंता में हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि कारोबार धीमा पड़ा तो सबसे पहले कारीगरों का काम बंद होगा। कई कारीगरों ने पहले ही चिंता जतानी शुरू कर दी है कि यदि ऑर्डर नहीं मिले तो उन्हें वापस अपने गांव लौटना पड़ेगा।
15 हजार छोटे-बड़े ज्वैलर्स प्रतिष्ठानो पर संकट
देहरादून। उत्तराखण्ड में करीब 15 हजार छोटे-बड़े ज्वैलर्स प्रतिष्ठानों पर इसका सीधा असर दिखाई देने लगा है। हर दुकान में औसतन 5 लोगों को रोजगार मिलता है, यानी अकेले उत्तराखण्ड में हजारों परिवार इस कारोबार पर निर्भर हैं। सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि देशभर में सालाना करीब 1 टन से अधिक सोने का कारोबार होता है और लगभग 5 करोड़ लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग से जुड़े हैं। ऐसे में सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री की ‘सोना कम खरीदने’ की अपील ने पूरे व्यापार जगत में पैनिक जैसा माहौल बना दिया है।
मोदी जी अपने हैं, लेकिन फैसला गलतः मेंसोन
सर्राफा मण्डल देहरादून के अध्यक्ष सुनील मेंसोन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके परिवार के मुखिया जैसे हैं, लेकिन इस बार लिया गया फैसला गलत है और इस पर पुनर्विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के बयान के बाद बाजार में पैनिक जैसा माहौल बन गया है। ग्राहकों ने खरीदारी टालनी शुरू कर दी है और छोटे कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
कारीगर भुखमरी की कगार पर पहुंचेंगेः गुरजीत
ज्वैलर्स एसोसिएशन ऑफ उत्तरांचल के प्रदेश महासचिव व ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक कौंसिल के निदेशक गुरजीत सिंह ने कहा कि सोने पर आयात शुल्क को एकदम से 6 प्रतिशत से 15 प्रतिशत करना एकतरफा फैसला है। उन्होंने कहा कि यदि एक साल तक कारोबार प्रभावित रहा तो व्यापारी अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे करेंगे। आभूषण निर्माता और कारीगर सर्राफा कारोबार की रीढ़ हैं और मंदी आने पर सबसे ज्यादा असर उन्हीं पर पड़ेगा।
इन फैसलों से देश मकजोर होगाः मित्तल
निरज मित्तल, प्रदेश अध्यक्ष ज्वैलर्स फोरम उत्तराखण्ड ने कहा कि हमने आज तक पीएम मोदी के हर फैसले को माना, हमेशा साथ दिया, मंदी की मार का सामने कर रहे कारोबारियों पर मोदी के बयान से संकट आ गया है। कारोबारी संगठनों से वार्ता कर रास्ता निकाला जाना चाहिए था, अब सड़को पर उतरने को मजबूर होना पड़ रहा है। जनता हमारा साथ दे, समाज के एक अंग के कमजोर होने से देश कमजोर होगा।
इतिहास बताता है कि ड्यूटी बढ़ी, लेकिन मांग नहीं घटी
सर्राफा कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि भारत में सोना केवल आभूषण नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक है। विशेषज्ञों के अनुसार, पहले भी कई बार सोने पर आयात शुल्क बढ़ाया गया, लेकिन कुछ समय बाद मांग फिर बढ़ गई। इसके साथ ही तस्करी और अनौपचारिक कारोबार में भी बढ़ोतरी देखी गई। व्यापारियों का कहना है कि सरकार को केवल आयात शुल्क बढ़ाने के बजाय ज्वैलरी एक्सपोर्ट, रिसाइकलिंग और कारीगरों के कौशल विकास पर ध्यान देना चाहिए ताकि भारत वैश्विक ज्वैलरी हब बन सके।
- 2011 में भारत ने रिकॉर्ड 969 टन सोना आयात किया। इसके बाद सरकार ने कई बार इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाई।
- 2013 में 10 प्रतिशत और बाद में 15 प्रतिशत तक टैक्स पहुंचा। लेकिन नतीजा क्या हुआ?
- तस्करी बढ़ी
- दुबई रूट सक्रिय हुआ
- ग्रामीण मांग जारी रही
- निवेश के तौर पर गोल्ड खरीद बढ़ती रही
- विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में सोना सिर्फ “लक्ज़री” नहीं बल्कि
- महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा
- संकट का सहारा
- पीढ़ियों की बचत
- सामाजिक प्रतिष्ठा
- का प्रतीक है।
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