गैस की किल्लतः होटल- ढाबे वाले लकड़ी के चूल्हे से चला रहे काम, दुकानदारी भी हुई आधी

Hotel owners are running their operations using wood-fired stoves

देहरादून। Hotel owners are running their operations using wood-fired stoves ईरान इजराइल और अमेरिका युद्ध के कारण भारत में घरेलू गैस की किल्लत हो गयी है। जिसका असर  आम आदमी के साथ-साथ होटल ढाबे चलाने वाले व्यापारियों के काम काज पर पड़ता दिखाई दे रहा है। आलम ये है कि ढावे वालों को कमर्शियल एलपीजी मिल नहीं पा रहा है। ढाबा व्यापारी सतवीर जो कि देहरादून में ईसी रोड पर फेमस समोसे की दुकान लगाते हैं।

उन्होंने बताया कि वो कई साल पहले छोड़ चुके अपने पुरखों की लकड़ी की भट्टी को दोबारा इस्तेमाल कर रहे है। समोसा विक्रेता सतवीर ने बताया कि गैस सप्लायरों ने सिलेंडर से मना कर दिया है। ऐसे में लकड़ी की भट्टी से ही काम चला रहे हैं। उन्होंने जब से अपने पूर्वजों की ये दुकान संभाली थी, तब से लकड़ी की भट्टी का इस्तेमाल नहीं किया। पहली बार वो लकड़ी की भट्टी का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके दादा-परदादा कभी उसका इस्तेमाल किया करते थे।

एक और छोटे ढाबा व्यापारी कालूराम शर्मा ने बताया कि उनके पास पिछले 12 दिन से कोई सिलेंडर नहीं है। उन्हें कमर्शियल गैस नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि वो अपनी दुकान पर चाय तक भी ग्राहकों को बमुश्किल से पिला पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि  भले ही उनकी दुकान खुली है, लेकिन वो कोई काम नहीं कर पा रहे हैं। इसका असर उनकी आमदनी पर बुरी तरह से पड़ा है। उनके सामने अब आजीविका संकट और गहरा होने लगा है। अब वो इस बात से खासे चिन्तित है कि वे अपना घर परिवार कैसे चलाएंगे।

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