जरूरत आविष्कार की जननी Jarurat avishkar ki janani

Jarurat avishkar ki janani
जरूरत आविष्कार की जननी Jarurat avishkar ki janani
हिना आज़मी

“नीड इज द मदर ऑफ इन्वेंशन” अंग्रेजी का बहुत प्रचलित कथन है , इसका मतलब है कि (Jarurat avishkar ki janani) आवश्यकता पड़ने पर ही हम किसी चीज पर विचार करते हैं, उस पर रिसर्च करते हैं और फिर आवश्यकतानुसार उसका आविष्कार करते हैं।

एक उदाहरण द्वारा इसे समझाया जा सकता है – यदि कोई व्यक्ति अगर घर पर अकेला हो, वह भूखा हो और घर पर कोई ना हो, उसे खाना बनाना भी ना आता हो, वह अपनी भूख शांत करने के लिए खाना बनाता है, चाहे कैसा भी बने बाद में उसे पता चल जाता है, कि उसकी क्या-क्या गलतियां थी ? वह खाना बनाना सीख जाता है। यहां भूख की आग उसके खाना बनाने का कारण बनी।

जरा इसे भी पढ़ें : “बगल में छोरा और शहर में ढिंढोरा”

इस संदर्भ में हम मानव सभ्यता के विकास के चरणो पर विचार कर सकते हैं। आदिमानव पहले कंद मूल खाया करता था। तत्पश्चात वह शिकार करने लगा, शिकार करने के लिए भी उसे औजार की आवश्यकता पड़ी , उसने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल कर औजार बनाए, फिर उसे जरूरत पड़ी मांस को भूनने और सर्दी से बचने के लिए आग की।  उसने आग का आविष्कार किया।

वक्त गुजरता गया मनुष्य ने पहिए का आविष्कार किया, समूह में रहना शुरू किया, खेती की, विनिमय के लिए मानक स्थापित किए, फिर कबीलों में रहा और हर युग में मानव विकास करता गया और एक आज का दिन है जहां मानव ने जल- थल -वायु में भी अपनी पहुंच बना ली है, तथा वह  अपना पचरंग लहरा रहा है।

जरा इसे भी पढ़ें : जानिए भारत में रविवार को क्यों मनायी जाती है छुट्टी

किसी ने कभी यह परिकल्पना नहीं की होगी कि मानव कभी आसमान में उड़ भी सकता है , वायुयान के आविष्कार ने इस असंभव बात को संभव किया। विज्ञान इतना आगे बढ़ चुका है कि आज चांद पर भी मानव की पहुंच संभव है, तभी हम आवश्यकता को आविष्कार या खोज की जननी कहते हैं।

जरा इसे भी पढ़ें : जानिए बकरी के दूध पीने के हैरत कर देने वाले फायदों के बारे में