चंदा चोरी से ध्यान हटाने को ‘लाउडस्पीकर’ का सहारा

Action to remove loudspeakers from mosques

देहरादून। Action to remove loudspeakers from mosques उत्तराखंड में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। प्रशासन सर्वाेच्च न्यायालय के निर्देशों और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन बता रहा है, जबकि आलोचकों का आरोप है कि सरकार धार्मिक स्थलों पर हुई कथित चंदा चोरी के मामलों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस मुद्दे को प्रमुखता दे रही है।

आलोचकों का कहना है कि राम मंदिर और बद्रीनाथ धाम में दान राशि से जुड़े विवादों के बाद सरकार लगातार सवालों के घेरे में रही। मीडिया और सोशल मीडिया पर इन मामलों को व्यापक रूप से उठाए जाने के बीच अब प्रशासन की कार्रवाई का केंद्र मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकर बन गए हैं।

उधम सिंह नगर पुलिस ने सर्वाेच्च न्यायालय के ध्वनि प्रदूषण संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुपालन का हवाला देते हुए जिलेभर में अभियान चलाया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति के निर्देशन में बिना अनुमति संचालित होने वाले, निर्धारित डेसिबल सीमा से अधिक ध्वनि करने वाले तथा रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक संचालित लाउडस्पीकरों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान जसपुर, काशीपुर, आईटीआई, केलाखेड़ा, किच्छा, नानकमत्ता और खटीमा क्षेत्रों की कई मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए गए। कुछ मामलों में पुलिस एक्ट की धारा 81 के तहत चालान भी किए गए।

देहरादून जिले के विकासनगर, सेलाकुई, जमनीपुर, कारगी, बंजारावाला और मोथरावाला समेत कई इलाकों में भी पुलिस और प्रशासन द्वारा मस्जिद प्रबंधन से लाउडस्पीकर हटाने या नियमों के अनुरूप संचालित करने को कहा गया।

इस कार्रवाई को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि उद्देश्य केवल ध्वनि प्रदूषण रोकना है, तो कार्रवाई सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों और अन्य सार्वजनिक आयोजनों पर समान रूप से दिखाई देनी चाहिए। उनका आरोप है कि केवल मस्जिदों पर केंद्रित कार्रवाई से निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

उधम सिंह नगर के एसएसपी अजय गणपति का कहना है कि यह अभियान पूरी तरह सर्वाेच्च न्यायालय के आदेशों और शासन के निर्देशों के अनुरूप चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि कानून का पालन सभी के लिए समान है और भविष्य में भी बिना अनुमति या नियमों का उल्लंघन कर ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।उन्होंने नागरिकों से शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने और ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन करने की अपील की है।

इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सरकार समर्थक इसे कानून का निष्पक्ष पालन बता रहे हैं, जबकि विरोधी दल और कुछ सामाजिक संगठनों का आरोप है कि संवेदनशील धार्मिक मुद्दों को प्रमुखता देकर सरकार अन्य विवादों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।

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