Struggle over appointment of Shehar Qazi
- वक़्फ़ बोर्ड ने मस्जिद कमेटी को भेजा नोटिस
- तत्काल प्रभाव से नियुक्ति रद्द करने का सुनाया फरमान
- कमेटी कानूनी लड़ाई को तैयार, शहर में बढ़ा तनाव
देहरादून। Struggle over appointment of Shehar Qazi उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून में शहर क़ाज़ी मौलाना मोहम्मद अहमद क़ासमी के निधन के बाद इस पद पर की गई नई नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विगत दिवस मुफ्ती हशीम क़ासमी को शहर क़ाज़ी नियुक्त किए जाने के तुरंत बाद उत्तराखंड वक़्फ़ बोर्ड ने इस पर आपत्ति जताते हुए औपचारिक नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि वर्तमान परिस्थितियों में समिति को शहर क़ाज़ी की नियुक्ति करने का अधिकार नहीं हैं, और यह नियुक्ति नियमों के विपरीत प्रतीत होती है।
वक़्फ़ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी की और से जारी कार्यकाल आदेश में कहा गया है कि, वक़्फ़ मस्जिद पलटन बाज़ार एवं वक़्फ़ ईदगाह की प्रबंधन समिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, अध्यक्ष ने त्याग पत्र दे दिया है और सचिव का निधन हो चुका है इसलिए मौजूदा समिति पूर्ण अधिकारिक स्थिति में नहीं है।
बोर्ड ने पूछा है कि क्या बिना पूर्ण अधिकार और बोर्ड की स्वीकृति के शहर क़ाज़ी की नियुक्ति की जा सकती है? अधिनियम के अनुसार किसी भी प्रबंध समिति को शहर क़ाज़ी नियुक्त करने का अधिकार नहीं है।
नोटिस के अनुसार नियुक्ति को तत्काल निरस्त करने की कार्यवाही करते हुए बोर्ड को अवगत कराने को कहा गया है, वहीं समिति के उपाध्यक्ष नसीम अहमद ने कहा कि बोर्ड के पत्र का कानूनी पहलू से अध्ययन किया जा रहा, हम इसके कानूनी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। परामर्श के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।
शहर में विरोध और असंतोष की लहर
शहर में इस नियुक्ति को लेकर लगातार विरोध के स्वर उभर रहे हैं। कई धार्मिक, सामाजिक और स्थानीय संगठनों ने प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। लोग कह रहे हैं कि इतने महत्वपूर्ण धार्मिक पद पर नियुक्ति ‘रायशुमारी’ और ‘सर्वसम्मति’ के बिना कैसे कर दी गई? कुछ का कहना है कि यह नियुक्ति “गुपचुप तरीके” से हुई है, जिसमें समुदाय का विश्वास शामिल नहीं था। वहीं दूसरी ओर समर्थकों का कहना है कि यह नियुक्ति आवश्यक थी और देरी से धार्मिक मामलों में भ्रम पैदा हो रहा था।
अब आगे क्या?
वक़्फ़ बोर्ड की ओर से आगे कठोर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। समिति भी कानूनी मोर्चे पर उतरने की तैयारी कर रही है। शहर में धार्मिक सद्भाव बिगाड़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। देहरादून में शहर क़ाज़ी की नियुक्ति जितनी शांत प्रक्रिया होनी चाहिए थी, उतनी ही विवादित बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह मामला और गरमाएगा या समाधान की ओर बढ़ेगा—यह बोर्ड और समिति के बीच होने वाले अगले फैसलों पर निर्भर करेगा।
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