Madarasa cannot be closed
- इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
- जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के आदेश को किया निरस्त
- 24 घंटे में सील मदरसे को खोलने के दिए आदेश
- असम और उत्तराखंड की कार्रवाई पर भी पड़ेगा असर
लखनऊ/देहरादून। Madarasa cannot be closed इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल मान्यता (रिकॉग्निशन) न होने के आधार पर किसी मदरसे को बंद या सील नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने श्रावस्ती जिले में एक मदरसे को बंद करने के प्रशासनिक आदेश को रद्द करते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया।
यह फैसला मदरसा अहले सुन्नत इमाम अहमद रज़ा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य सरकार मामले में सुनाया गया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने की। आदेश की तारीख 16 जनवरी 2026 है।
क्या था मामला
श्रावस्ती के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने 1 मई 2025 को यह कहते हुए मदरसे को बंद करने का आदेश जारी किया था कि वह बिना मान्यता के संचालित हो रहा है। इसके बाद मदरसे को सील कर दिया गया, जिसके खिलाफ प्रबंधन ने हाईकोर्ट का रुख किया।
मदरसा प्रबंधन की दलील
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि—उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा विनियम, 2016 के नियम 13 में मान्यता न होने पर सिर्फ सरकारी अनुदान न मिलने का प्रावधान है, मदरसा बंद करने का कोई प्रावधान नहीं है। मदरसा न तो सरकारी सहायता चाहता है और न ही मान्यता।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि ऐसी संस्थाएं संविधान के अनुच्छेद 30(1) के तहत पूरी तरह संरक्षित हैं।
राज्य सरकार का पक्ष
राज्य सरकार ने तर्क दिया कि बिना मान्यता के पढ़ने से छात्रों को भविष्य में नुकसान हो सकता है, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि नियमों में मदरसा बंद करने का स्पष्ट अधिकार प्रशासन को नहीं दिया गया है।
हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने मदरसा बंद करने का आदेश रद्द कर दिया। प्रशासन को निर्देश दिया कि 24 घंटे के भीतर मदरसे से सील हटाई जाए। स्पष्ट किया कि मान्यता न होने पर कोई सरकारी अनुदान नहीं मिलेगा। मदरसा बोर्ड परीक्षाओं में बैठाने के लिए बाध्य नहीं होगा। छात्रों की योग्यता को सरकारी लाभों के लिए मान्यता नहीं मिलेगी।
असम और उत्तराखंड पर भी पड़ेगा असर
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला राष्ट्रीय स्तर पर अहम नजीर बनेगा। हाल के वर्षों में असम में बड़ी संख्या में बिना मान्यता वाले मदरसों को सील और ध्वस्त किया गया। उत्तराखंड में भी प्रशासन ने कई मदरसों को केवल मान्यता न होने के आधार पर बंद किया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद इन राज्यों में की गई कार्रवाइयों को भी अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
कानूनी संदेश साफ
हाईकोर्ट ने अपने फैसले से साफ कर दिया है कि संविधान के अनुच्छेद 30(1) के तहत संरक्षित अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को केवल प्रशासनिक आदेश से बंद नहीं किया जा सकता।
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