‘सैयद काम करता है’ शीर्षक पुस्तक का विमोचन

Launch of the book titled ‘Sayed Kaam Karta Hai’

देहरादून। Launch of the book titled ‘Sayed Kaam Karta Hai’ डॉ. अब्दुल हई की लिखी किताब ‘सैयद काम करता है’ का भव्य लॉन्च समारोह नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया में ‘ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस’ और ‘हाली पब्लिशिंग हाउस’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में किताब का परिचय देते हुए डॉ. अब्दुल हई ने कहा कि उन्हें संयोग से इस किताब को संपादित करने का मौका मिला, लेकिन वे खुद को खुशकिस्मत मानते हैं कि उन्हें ऐसी शख्सियत पर काम करने का अवसर मिला जिन्होंने उर्दू भाषा और साहित्य की निस्वार्थ सेवा की थी।

मुख्य अतिथि प्रोफेसर अख्तरुल वासे ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. सैयद अहमद खान के जीवन और उनकी सेवाओं – विशेषकर यूनानी चिकित्सा, इक़बाल स्टडीज़ और उर्दू भाषा-साहित्य में उनके असाधारण योगदान, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता – पर आधारित इस किताब का प्रकाशन एक महत्वपूर्ण घटना है। अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रोफेसर अब्दुल हक ने अल्लामा इक़बाल की जयंती, 9 नवंबर को ‘विश्व उर्दू दिवस’ के रूप में मनाने की पहल को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि इसका सकारात्मक असर न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी दिखाई दे रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार मासूम मुरादाबादी ने बताया कि ‘सैयद काम करता है’ शीर्षक मशहूर शायर अकबर इलाहाबादी की एक प्रसिद्ध पंक्ति से लिया गया है, जो सर सैयद अहमद खान की सेवाओं की प्रशंसा में लिखी गई थी। उन्होंने कहा कि यह शीर्षक डॉ. सैयद अहमद खान के सक्रिय, मेहनती और बहुआयामी व्यक्तित्व को बखूबी दर्शाता है। शेख अलीमुद्दीन असदी ने कहा कि डॉ. खान ने न केवल यूनानी चिकित्सा के विकास में बल्कि उर्दू भाषा और साहित्य की सेवा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और उनका यह योगदान प्रशंसा के योग्य है।

इस सभा को डॉ. सैयद फारूक, कमरउद्दीन, प्रोफेसर सलीम किदवई, अशरफ मेवाती और खुर्शीद हयात समेत अन्य विद्वानों और साहित्यकारों ने भी संबोधित किया। डॉ. सैयद फारूक ने डॉ. सैयद अहमद खान के प्रयासों की सराहना की और कहा कि समाज के लिए उनका निस्वार्थ कार्य सराहनीय है।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों में डॉ. मिर्जा आसिफ बेग, डॉ. मोहम्मद अरशद गियास, डॉ. शकील अहमद, डॉ. शमसुद्दीन आजाद, डॉ. अल्ताफ अहमद, अतहर अंसारी, सलीम अलीगढी, डॉ. शमीम अख्तर, हामिद अली अख्तर, एडवोकेट शाहजबीन काजी, प्रोफेसर आरिफ जैदी, डॉ. खुर्शीद अहमद आजमी, मुनव्वर हसन कमाल सहित बड़ी संख्या में लेखक, बुद्धिजीवी और उर्दू साहित्य प्रेमी शामिल थे।

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