स्वर्ण शिल्पकारों के हुनर को बचाने की उठी मांग

Call raised to preserve skills of gold artisans

देहरादून। Call raised to preserve skills of gold artisans तकनीक और मशीनों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच हाथ से स्वर्ण आभूषण तैयार करने वाले पारंपरिक कारीगरों के हुनर और उनके हितों को संरक्षण देने की जरूरत है। स्वर्ण शिल्पी एकता मंच एवं स्वर्ण शिल्पी समिति, देहरादून (सर्राफा मंडल) की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय स्वर्ण शिल्पी अधिवेशन में देशभर से आए प्रतिनिधियों ने कारीगरों की समस्याओं, उनके रोजगार, प्रशिक्षण, उचित मेहनताना और सामाजिक-आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर मंथन किया।

3 व 4 अक्टूबर 2026 को राजा रोड स्थित लाला कालूमल धर्मशाला में आयोजित अधिवेशन में देश के विभिन्न राज्यों और शहरों से स्वर्ण शिल्पी एकता मंच के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा स्वर्ण समिति देहरादून, सर्राफा मंडल और ज्वैलर्स उत्तरांचल से जुड़े पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

Call raised to preserve skills of gold artisans

अधिवेशन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सोने को आकर्षक आभूषण का रूप देने का वास्तविक हुनर कारीगरों के हाथों में है। वर्षों के अनुभव और पीढ़ियों से चले आ रहे कौशल के बावजूद मशीनों और आधुनिक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के कारण हाथ से काम करने वाले कारीगरों के सामने रोजगार और आमदनी का संकट पैदा हो रहा है।

मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष कालिदास उमापति सिन्हा राय ने कहा कि स्वर्ण कारोबार को मजबूत और सुरक्षित बनाए रखने के लिए कारीगरों का संरक्षण जरूरी है। आज मशीनों के माध्यम से कम समय में बड़ी मात्रा में उत्पादन हो रहा है, लेकिन हाथ से आभूषण तैयार करने वाले कारीगरों की कला और बारीकी की अपनी अलग पहचान है। उन्होंने कहा कि तकनीक के बदलते दौर में कारीगरों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देकर उन्हें कुशल तकनीकी विशेषज्ञ और इंजीनियर के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।

उन्होंने देश के प्रमुख शहरों में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के अधिक से अधिक केंद्र स्थापित करने की मांग भी उठाई, ताकि कारीगरों और ज्वैलर्स को मानकों एवं तकनीकी प्रक्रियाओं की जानकारी आसानी से मिल सके।

भारतीय मानक ब्यूरो के उत्तराखंड निदेशक हेमंत बी. आटे ने कहा कि सरकार समय-समय पर ज्वैलर्स और कारीगरों को शुद्धता एवं गुणवत्ता से संबंधित दिशा-निर्देश जारी करती रहती है। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक और मानकों को समझने के लिए कारीगरों को और अधिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।

मंच के महासचिव अमजद अली (चेन्नई) ने कहा कि कुशल कारीगरों को उनके हुनर और मेहनत का उचित मूल्य मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कारीगर ही अपने हाथों के हुनर से सोने को सुंदर और आकर्षक आभूषण में बदलते हैं। इसलिए उनके श्रम और कौशल को केवल मजदूरी के नजरिए से नहीं, बल्कि एक पारंपरिक कला और तकनीकी कौशल के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मशीनों के कारण उत्पादन की प्रक्रिया भले तेज हुई है, लेकिन हाथ से काम करने वाले कारीगरों की कला को समाप्त होने से बचाना समाज और उद्योग दोनों की जिम्मेदारी है।

अधिवेशन में कारीगरों के रोजगार की सुरक्षा, उचित पारिश्रमिक, आधुनिक प्रशिक्षण, सामाजिक सुरक्षा, तकनीकी शिक्षा, काम के बेहतर अवसर और स्वर्ण कारोबार में उनकी भूमिका को मजबूत करने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि पारंपरिक हुनर को सुरक्षित रखना है तो नई पीढ़ी को इस क्षेत्र से जोड़ने के लिए बेहतर अवसर और सम्मानजनक आय सुनिश्चित करनी होगी। इस अवसर पर मंच के राष्ट्रीय पदाधिकारियों में अध्यक्ष कालिदास उमापति सिन्हा राय (मुंबई), महासचिव अमजद अली (चेन्नई), कोषाध्यक्ष एम. रहमान भुट्टो (दिल्ली), वरिष्ठ उपाध्यक्ष शेख जान मोहम्मद (हैदराबाद), उपाध्यक्ष मनोज मंडल (मेरठ), संयुक्त सचिव विकास रंजन बाघ (मुंबई), संयुक्त सचिव शेख इमरान अली (कोयंबटूर), संयुक्त कोषाध्यक्ष मिराज उद्दीन मलिक (हिसार), सहायक कैशियर शेख सरिफुल हसन (जोधपुर), अकाउंटेंट कार्तिक भूमिक (दिल्ली), संयुक्त अकाउंटेंट इलियास मोल्ला (जयपुर) और मीडिया प्रभारी अविनाश चंद्र (दिल्ली), सुनील मेसौन अध्यक्ष सर्राफा मंडल देहरादून, शेख इकबाल हुसैन (देहरादून), मक्केल अली शेख (मेरठ), मेघनाथ मंडल (देहरादून), अशरफभाई चौधरी (राजकोट), सिराजुद्दीन सरकार (हैदराबाद), अबीर बनर्जी (कोलकाता), एस.के. रकीबुल मंडल (कोयंबटूर), अंजन कुमार गारंग (बेंगलुरु), नयन धर (असम), यासीन मल्लिक (आगरा), संजय शाह (दिल्ली), आलमगीर मंडल (कोयंबटूर), मोहितोष जाना (हैदराबाद) मानक ब्यूरों के सचिन चौधरी व श्रीकांत मिश्रा आदि शामिल हैं।

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