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चारधाम यात्रा में हेली टिकटों की कालाबाजारी, श्रद्धालुओं से लिये जा रहे 6390 के 26 हजार रूपये

Black marketing of helicopter tickets for Char Dham Yatra

देहरादून। Black marketing of helicopter tickets for Char Dham Yatra बाबा केदारनाथ के दर्शन की आस लेकर हजारों श्रद्धालु दूर-दराज के इलाकों से उत्तराखंड पहुँचते हैं। कोई बुजुर्ग माता-पिता को धाम ले जाना चाहता है, कोई परिवार के साथ जीवन की इस विशेष यात्रा को पूरा करना चाहता है, तो कोई कठिन परिस्थितियों के बावजूद बाबा केदार के दर्शन की उम्मीद लेकर निकलता है। लेकिन यदि इसी आस्था के सफर में हेलीकॉप्टर टिकट के नाम पर निर्धारित किराये से कई गुना अधिक रकम माँगे जाने लगे, तो यह श्रद्धालुओं के लिए चिंता का विषय है।

केदारनाथ हेलीकॉप्टर सेवा के टिकटों को लेकर ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार एरो एविएशन की हेली टिकट के लिए श्रद्धालुओं से केदारनाथ जाने के 25,000 से 26,000 तक की राशि मांगी जा रही है। जिसका सामान्य किराया 6,390 रूपये है।

मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, भीड़ बढ़ने पर टिकट की कीमत 6,390 से बढ़ाकर 26,000 तक किए जाने की बात कही गई। अतिरिक्त रकम किस आधार पर माँगी जा रही है और इसका लाभ किसे मिल रहा है?
श्रद्धालुओं के लिए यह वर्षों से संजोया सपना, परिवार की आस्था और जीवन की एक महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा होती है। ऐसे में टिकट की व्यवस्था पारदर्शी होना और यात्रियों को निर्धारित नियमों के अनुसार सेवा मिलना बेहद जरूरी है।

इस मामले में ऐरो एविएशन के सहायक प्रबंधक लोकेश की भुमिका संदिग्ध पाई जा रही है। जो पिछले 10 वर्षो से इस कंपनी में कार्यरत है। क्योंकि जानकारी के मुताबिक यात्रियों के उड़ान से पहले फाइनल लिस्ट इन्ही के द्वारा जारी किया जाता है। यात्रियों को सुबह 4ः30 बजे बुलाकार इनसे ही मिलने के लिए बोला जाता है।

इस मामले में टिकट और बोर्डिंग पास जारी करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार श्रद्धालुओं को टिकट से पहले ही बोर्डिंग पास दिया जा रहा है। साथ ही सुबह 4ः30 बजे ही बोर्डिंग पाॅइंट पर बुला लिया जाता है। यदि किसी श्रद्धालु यात्री को सुबह 4ः30 बजे बुलाकर टिकट या बुकिंग की स्पष्ट पुष्टि से पहले बोर्डिंग पास दिया जा रहा है, तो ऐरो एविएशन हेली ऑपरेटर और अधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसी प्रक्रिया किन नियमों के तहत अपनाई जाती है। यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि यात्रियों को बुकिंग, भुगतान, टिकट और बोर्डिंग पास से संबंधित स्पष्ट जानकारी मिले, ताकि कोई भी व्यक्ति भ्रम या अनधिकृत वसूली का शिकार न बने।

कंपनी के मैनेजर विक्रम सिंह ने इस विषय में बताया कि लोकेश जी कंपनी में पिछले 10 वर्षो से कार्यरत है। और कंपनी को इस विषय में कोई जानकारी नहीं है, हां लेकिन बीच-बीच में श्रद्धालुओं द्वारा इसकी शिकायत मिलती आई है कि कुछ एजेंटो द्वारा 30 हजार से 35 हजार तक किराया लिया जाता है। लेकिन इसमें हमारी कोई भुमिका नहीं है।

केदारनाथ हेलीकॉप्टर टिकटों की कथित कालाबाजारी का मुद्दा पहले भी सार्वजनिक चर्चा में आ चुका है। 11 मई 2018 को ’हिंदुस्तान टाइम्स’ ने खबर प्रकाशित की थी कि केदारनाथ हेलीकॉप्टर टिकटों की कालाबाजारी की शिकायतों के मद्देनजर उत्तराखंड के अधिकारियों ने पुलिस से मदद माँगी थी। इसके बाद 22 जुलाई 2018 को ’द टाइम्स आॅफ इंडिया’ ने हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जाँच से संबंधित रिपोर्ट प्रकाशित की थी। ये खबरें बताती हैं कि हेलीकॉप्टर टिकटों की बुकिंग में पारदर्शिता और निगरानी का सवाल पहले भी उठ चुका है।

बाबा केदार के दर्शन हर श्रद्धालु के लिए भावनाओं से जुड़ा विषय हैं। कई परिवार अपनी बचत से यात्रा का खर्च जुटाते हैं। ऐसे में यदि कोई अनधिकृत एजेंट निर्धारित किराये से अधिक रकम माँगता है, तो इसका सबसे बड़ा बोझ आम श्रद्धालु पर पड़ सकता है।
उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण और संबंधित अधिकारियों को चाहिए कि वे लागू किराये, टिकट आवंटन, अधिकृत बुकिंग माध्यमों और एजेंटों की भूमिका के संबंध में स्पष्ट जानकारी दें। यदि जाँच में नियमों के विरुद्ध अतिरिक्त वसूली या अनधिकृत टिकट बिक्री की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब सवाल यह है कि :-
क्या संबंधित अधिकारी इस मामले की जाँच कर श्रद्धालुओं के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेंगे?
अगर टिकट कालाबाजारी की जानकारी पहले से कम्पनी को थी तो उस पर कंपनी के अधिकारियों या संबंधित अधिकारियों ने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की?
वर्ष 2018 में भी टिकट कालाबाजारी का मुद्दा सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाये?
टिकट से पहले ही बोर्डिंग पास क्यों दे दिया जाता है और टिकट उड़ान से ठीक पहले ही क्यों दिया जाता है?

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