हजः इबादत, इंसानियत और रूहानियत का अज़ीम मंज़र

Hajj : A Magnificent Panorama of Worship and Spirituality

जद्दाह। अरब की पाक सरज़मीं पर एक बार फिर “लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक” की सदाएँ गूंज उठीं। दुनिया के 180 देशों से आए 17 लाख से ज़्यादा मुसलमान, एक ही लिबास, एक ही मकसद और एक ही जज़्बे के साथ अल्लाह के घर की तरफ़ बढ़ते दिखाई दिए। यह कोई मामूली मंज़र नहीं, बल्कि इंसानियत, बराबरी और बंदगी का वह अज़ीम संगम है, जिसे दुनिया “हज” के नाम से जानती है।

साल 2026 की हज यात्रा के साथ मक्का मुकर्रमा और मदीना मुनव्वरा में रूहानियत का ऐसा समंदर उमड़ा, जिसमें रंग, नस्ल, भाषा, अमीरी और गरीबी की तमाम दीवारें ढहती नजर आईं। सफेद एहराम में लिपटे लाखों इंसान इस बात की गवाही देते दिखाई दिए कि अल्लाह के दरबार में इंसान की पहचान उसके माल और ओहदे से नहीं, बल्कि उसके ईमान, अमल और तक़वा से होती है।

इस साल भारत से करीब 1 लाख 75 हजार 25 हाजी हज यात्रा के लिए सऊदी अरब पहुंचे। दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, हैदराबाद, श्रीनगर, अहमदाबाद और कोलकाता समेत कई एम्बार्केशन पॉइंट्स से हाजियों की उड़ानें लगातार मक्का पहुंचीं।

भारतीय हाजियों के चेहरों पर एक अलग ही सुकून और रूहानी चमक दिखाई दी। किसी की आंखों में काबा को देखने की तड़प थी, तो कोई अरफ़ात में दुआ के लिए बेचैन नजर आया। हर दिल में बस एक ही तमन्ना थी, “ऐ अल्लाह, तू राज़ी हो जा।”

हज की शुरुआत के साथ लगभग 24 हजार बसों के जरिए लाखों हाजियों को मक्का से मीना पहुंचाया गया। मीना में 45 हजार से अधिक आधुनिक और वातानुकूलित टेंट लगाए गए, जिनमें 24 लाख से 30 लाख लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई।

इस बार कई टेंटों में सोफा-कम-बेड और आधुनिक सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई गईं। भीषण गर्मी से राहत देने के लिए कूलिंग सिस्टम, पानी के फव्वारे और एयरकंडिशन शेल्टर बनाए गए। हाजियों को लगातार पानी, ओआरएस और मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध को देखते हुए सऊदी अरब सरकार ने हज 2026 को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए 1 लाख से अधिक सुरक्षा कर्मियों और पैरामिलिट्री जवानों को तैनात किया है। ड्रोन निगरानी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फेस रिकग्निशन तकनीक, थर्मल इमेजिंग और हजारों सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। सऊदी एयरफोर्स को पवित्र स्थलों के हवाई क्षेत्र की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एयर डिफेंस सिस्टम, एंटी टेरर यूनिट, कमांडो दस्ते और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें भी अलर्ट मोड पर हैं। सरकार ने साफ कहा है कि “अल्लाह के मेहमानों की सुरक्षा और खिदमत हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।”

8 ज़िलहिज्जाः-यौम-ए-तरवियाह
इस दिन हाजी एहराम बांधकर मीना की ओर रवाना होते हैं। पूरा दिन नमाज़, तिलावत और दुआओं में गुजरता है।


9 ज़िलहिज्जाः-यौम-ए-अरफ़ा
यह हज का सबसे अहम दिन माना जाता है। मैदान-ए-अरफ़ात में लाखों हाजी अपने रब के सामने हाथ उठाकर मग़फिरत की दुआ करते हैं। कहा जाता है कि अरफ़ात का दिन रहमतों और माफी का दिन होता है।

10 ज़िलहिज्जाः-ईद-उल-अज़हा
इस दिन जमरात को कंकड़ी मारी जाती है, कुर्बानी दी जाती है और काबा का तवाफ किया जाता है। यही दिन ईद-उल-अज़हा की खुशियों का दिन भी होता है।

11 और 12 ज़िलहिज्जा
हाजी मीना में रहकर तीनों जमरात को कंकड़ियाँ मारते हैं। यह अमल इंसान के अंदर मौजूद बुराई, घमंड और शैतानी ख्यालात के खिलाफ जंग का प्रतीक माना जाता है।

हज दुनिया को यह संदेश देता है कि इंसान चाहे किसी भी मुल्क, नस्ल या भाषा से ताल्लुक रखता हो, उसका रब एक है और इंसानियत सबसे बड़ी पहचान है। जब करोड़पति और गरीब एक ही एहराम में एक साथ चलते हैं, तो दुनिया को बराबरी का वह सबक मिलता है जिसे कोई ताकत मिटा नहीं सकती। हज यह सिखाता है कि मोहब्बत, सब्र, भाईचारा और इंसानियत ही असली दीन की रूह है।

काबा को पहली नजर देखने का एहसास, अरफ़ात में बहते आँसू, मीना की रातें और “लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक” की गूंज हर मोमिन के दिल में हमेशा के लिए बस जाती है।
हज केवल सफर नहीं, बल्कि इंसान की पूरी जिंदगी बदल देने वाला वह रूहानी सफर है, जहाँ बंदा अपने रब के सबसे करीब महसूस करता है। यही वजह है कि हज को इस्लाम की सबसे मुकद्दस, अज़ीम और रूहानी इबादतों में शुमार किया जाता है।