देश का कॉटन बेहद है कीमती

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देश का cotton बेहद है कीमती

हमारे देश का सूती वस्त्र तो पहले से ही मशहूर है इस बात का इतिहास गवाह है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें काफी नुक्सान हुआ है। भारत के cotton उत्पादक राज्य तेलंगाना, आंध्र प्रदेश से गुजरात एवं महाराज के कई इलाकों में पिछले वर्ष फसल पर गुलाबी बोल बम का हमला होने से देश के कॉटन का गणित गड़बड़ा गया है।

पहले विशेषज्ञ बंपर फसल के चलते 390 से 408 टन की पैदावार होने का अनुमान लगा रहे थे, लेकिन अब इसे कम करके 370 से 375 लाख गांठ प्रतिघात 170 किलोग्राम आका जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले कॉटन के रकबे में 1983 से उत्पादन में नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सकेगी।

दूसरा निर्यात के मोर्चे पर अब पाकिस्तान ने भारत से कॉटन के आयात की इजाजत दी है, यदि इसके बाद चीन विदेश से कॉटन आयात करता है, तो यहां से होने वाले निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।




कॉटन का रकबा 19 फ़ीसदी बड़ा चालू सीजन में देश में  129 लाख हेक्टेयर भूमि में कॉटन की खेती की गई है, जो पिछले साल की 108 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 19 फिसदी अधिक है। सूती वस्त्र बनाने में उपयोग कॉटन बेहद कीमती है क्योंकि यह हमारे देश की आर्थिकी में यानि निर्यात होकर राष्ट्रीय की समृद्धि को बढ़ती है।

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