Home Uttarakhand Dehradun आपसी सद्भाव बढ़ाने सड़को पर उतरे दून वासी

आपसी सद्भाव बढ़ाने सड़को पर उतरे दून वासी

Sadbhavana rally in Dehradun

देहरादून। Sadbhavana rally in Dehradun उत्तराखण्ड में लगातार बढ़ रहे साम्प्रदायिक तनाव को कम करने और आपसी सदभाव व भाईचारे को मजबूत करने के लिये रविवार को दून वासी सड़को पर निकले। कई सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों के आह्वान पर रविवार को को बडी संख्या में दून वासी गांधी पार्क में जमा हुए जहां से सभी अपने मुंह पर सफेद पट्टी बांध और हाथों में सद्भाव भरे नारे लिखी तख्तीयां लेकर घण्टा घर से पलटन बाजार होते हुए शहीद स्मारक पहुंचे, जहा जनगीत गा कर देश की अखंडता और एकता का संकल्प लिया गया।

रविवार को साम्प्रदायिक सदभाव व आपसी भाईचारे के लिऐ सीपीएम, सीपीआई, सीपीआई माले, कांग्रेस, सपा, यूकेडी, आयूपी, जनवादी महिला समिति, एसएफआई, बीजीवीएस, सर्वाेदय मण्डल जन संवाद समिति, किसान सभा, पीपुल्स फोरम, इफ्टा, जेडीएस सहित अनेक सामाजिक व बुध्दिजीवियों‌ इन्सानियत मंच के वैनर तले सदभावना मार्च निकालकर एकजुटता प्रदर्शित की। मार्च गांधी पार्क से होता हुआ घण्टाघर, पल्टन बाजार ,धामावाला से होता हुआ शहीद स्थल पंहुचा।

वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड को लगातार अशान्त करने के प्रयास हो रहे है। सच्ची झूठी कहानियों के सहारे राज्य में साम्प्रदायिक सौहार्द और भाईचारे को खत्म करने का प्रयास किये जा रहे हैं। ऐसे प्रयासों को राजनीतिक संरक्षण की भी बात सामने आ रही है। नागरिक समाज का सदस्य होने के नाते हम सबका कर्तव्य है कि ऐसी घटनाओं को रोकने, साम्प्रदायिक एकता व बंधुत्व बढ़ाने और भाईचारा बिगाड़‌ने व नफरत फैलाने वालों को कड़ा संदेश देने के लिए एकजुट हों।

कहा कि पिछले वर्ष लव जिहाद के नाम पर एक समुदाय के लोगों की पुरोला (उत्तरकाशी) छोड़ने को विवश किया गया। जिस तथाकथित घटना की आड़ में ऐसा किया गया, वह कोर्ट में झूठी साबित हो चुकी है। घाट (चमोली) में नाबालिग से छेड़‌छाड़ पर समुदाय विशेष के खिलाफ अभियान चलाया गया। धारचूला (पिथौरागढ़), चौरास (टिहरी) के साथ ही हल्द्वानी और देहरादून में बार-बार इस तरह की घटनाओं को दोहराया गया।

रुद्रप्रयाग जिले के कुछ गांवों में खास समुदाय के लोगों का प्रवेश वर्जित संबंधी बोर्ड भी इस नफरती अभियान का हिस्सा थे। हमारा मानना है कि एक व्यक्ति के अपराध के लिए पूरे समुदाय के खिलाफ अभियान चलाना एक सोची-समझी साजिश है। सल्ट में जगदीश की हत्या, सुभाई में दलित परिवारों का बहिष्कार, चक्की छूने पर दलित का गला काटना जैसी घटनाएं भी इस नफरत का हिस्सा है।

डॉ. रवि चोपड़ा ने कहा कि साम्प्रदायिक वैमनस्य की ज्यादातर घटनाओं में कुछ नाम हर बार सामने आये हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर तो होती है, मगर राजनीतिक दबाव के कारण कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती। देहरादून में रेलवे स्टेशन पर हुई घटना में दंगाई को जबरन थाने से छुड़ाना इसका उदाहरण है। इन स्थितियों में जब दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई करने में पुलिस व प्रशासन विफल है या उन्हें ऐसा करने से रोका जा रहा है तो नागरिक समुदाय को आगे आने की जरूरत है। हम उन अधिकारियों के आचरण की सराहना करते हैं, जो भीड़ के दबाव में झुके नहीं और भारत के संविधान के प्रति वफादार रहे।

राज्य आंदोलनकारी कमला पन्त ने कहा कि उत्तराखंड में अल्पसंख्यक समुदायों को अकारण निशाना बनाये जाने की घटनाओं से हम चिन्तित हैं। हमें अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि हाल के दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर महिला संगठनों के खुले पत्र और वरिष्ठ व जाने-माने लोगों की और से बार-बार आवाज उठाये जाने के बावजूद उत्तराखंड सरकार नफरत फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने से बच रही है। यह बढ़ती नफरत देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा है।

डॉ. शेखर पाठक ने कहा कि हम सरकार को याद दिलाना चाहते हैं कि नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है। अब कठोर कार्रवाई करने और सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसलों पर अमल करने का वक्त है। हम सरकार से मांग करते हैं कि प्रत्येक नागरिक, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति, क्षेत्र, लिंग का हो, उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।  नफरत फैलाने और साम्प्रदायिक हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। राज्य जिला और ब्लॉक स्तर पर बहुपक्षीय शांति समितियां बनें, ताकि स्थाई रूप से शांति स्थापित की जा सके।

इस अवसर पर रवि चौपड़ा, समर भण्डारी, कमला पन्त, इन्दु नौडीयाल, गरिमा दशौनी, रजिया बेग, प्रमिला रावत, निर्मला बिष्ट, सुरेन्द्र सजवाण, इन्देश मैखुरी, विजय भट्ट, अनन्त आकाश, त्रिलोचन भट्ट, सतीश भट्ट, जयसिंह रावत, वीके डोभाल, विभा पुरी दास, राकेश  अग्रवाल, हरिओम पाली, नन्द नन्दन पाण्डेय, जगमोहन मेहन्दीरता, शम्भूप्रसाद ममगाई, इन्द्रेश नौटियाल, लालचन्द्र शर्मा, सूर्य कान्त धस्माना, एह एस रजवार, अय्याज खान, जयकृत कण्डवाल, वीरेंद्र पोखरियाल , नवनीत गुंसाई आदि प्रमुख थे ।

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