उत्तराखंड में सड़क हादसों का कहर : 50 दिन में 36 की मौत

Road accidents wreak havoc in Uttarakhand

देहरादून। Road accidents wreak havoc in Uttarakhand उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाएं परिवहन विभाग के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। 1 जनवरी से 20 फरवरी 2026 के बीच प्रदेश में 36 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 138 लोग घायल हुए हैं और तीन अब भी लापता हैं। सबसे अधिक मौतें देहरादून और पिथौरागढ़ जिलों में दर्ज की गई हैं। हालांकि, सड़क सुरक्षा को लेकर 1 से 31 जनवरी तक राष्ट्रीय स्तर पर और 16 जनवरी से 14 फरवरी तक प्रदेश में विशेष अभियान चलाया गया, लेकिन इसके बावजूद हादसों का सिलसिला थम नहीं पाया।

परिवहन विभाग के अनुसार, हादसों की बड़ी वजह ओवरस्पीडिंग और हाईवे पर बनाए गए डिवाइडरों में अवैध कट हैं। कई स्थानों पर लगाए गए क्रैश बैरियर को क्षतिग्रस्त कर अनधिकृत रास्ते बना दिए गए हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। निर्माण एजेंसियों को ऐसे सभी कट बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रदेश में 37 स्थानों पर एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकगनाइजेशन) कैमरे लगाए गए हैं। 1 अप्रैल 2025 से 20 फरवरी 2026 तक कुल 5,19,498 चालान किए गए।

  • बिना हेलमेटः 1,60,414
  • पिछली सवारी बिना हेलमेटः 3,03,935
  • ओवरस्पीडिंगः 18,045
  • दोपहिया पर दो से अधिक सवारीः 35,559
  • गलत दिशा में वाहन चलानाः 1,545
  • ऑनलाइन चालान की संख्या में भी तेजी आई है। वर्ष 2023-24 में 84,542 चालान, 2024-25 में 1,41,432 और चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 5,19,498 चालान किए जा चुके हैं।

प्रदेश में अब तक 179 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 155 स्थानों पर सुधार कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 24 स्थानों पर काम बाकी है।

  • 46 ब्लैक स्पॉट पर तीन साल में कोई हादसा नहीं
  • 23 पर एक हादसा
  • 24 पर दो हादसे
  • 49 पर 3 से 5 हादसे
  • 29 पर 6 से 10 हादसे
  • 8 स्थानों पर 10 से अधिक हादसे दर्ज

संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव कुमार मेहरा का कहना है कि हादसों के असली कारणों की पहचान के लिए वैज्ञानिक विश्लेषण कराया जाएगा। इसके लिए देहरादून और हल्द्वानी में प्रशिक्षण भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में सड़कों की स्थिति बेहतर हुई है और वाहनों की रफ्तार बढ़ी है, जिससे ओवरस्पीडिंग एक नई चुनौती बनकर उभरी है। इस पर नियंत्रण के लिए प्रवर्तन कार्रवाई तेज की जा रही है।

परिवहन विभाग, पुलिस और शिक्षा विभाग मिलकर जागरूकता अभियान चला रहे हैं। विभाग को उम्मीद है कि सख्त प्रवर्तन, ब्लैक स्पॉट सुधार और तकनीकी निगरानी से भविष्य में सड़क हादसों में कमी लाई जा सकेगी।

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