Hindi journalism has courage to question those in power
हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: लोकतंत्र और राष्ट्र चेतना की मजबूत आवाज: राज्यपाल गुरमीत सिंह
देहरादून। Hindi journalism has courage to question those in power हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष केवल समय की गणना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की जीवंत गाथा हैं। यह बात उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने बुधवार को हरिद्वार में प्रेस क्लब हरिद्वार द्वारा आयोजित “हिंदी पत्रकारिता द्वि-शताब्दी समारोह” में कही। बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने सत्ता से सवाल पूछकर लोकतंत्र को मजबूत किया और समाज की चेतना को दिशा दी।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता का 200 वर्षों तक निरंतर सक्रिय रहना उसकी गहराई, प्रतिबद्धता और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने ‘उदन्त मार्तण्ड’ के प्रकाशन से आरंभ हुई इस यात्रा को राष्ट्र चेतना के जागरण का सशक्त माध्यम बताया।
आज हरिद्वार में प्रेस क्लब द्वारा आयोजित हिन्दी पत्रकारिता द्वि-शताब्दी समारोह में प्रतिभाग किया। 200 वर्षों की यह यात्रा हिंदी पत्रकारिता की गहराई, प्रतिबद्धता और लोकतांत्रिक चेतना का सशक्त प्रमाण है। ‘उदन्त मार्तण्ड’ से आरंभ हुई यह परंपरा आज भी सत्य, विवेक और मूल्यों के साथ… pic.twitter.com/cLsxBVCxnY
— LT GEN GURMIT SINGH, PVSM, UYSM, AVSM, VSM (Retd) (@LtGenGurmit) February 4, 2026
उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारत की भावनाओं, संस्कृति और आत्मा की अभिव्यक्ति है। हिंदी पत्रकारिता ने जन-जीवन की संवेदनाओं को स्वर दिया और समाज को दिशा देने का कार्य किया।
हिंदी पत्रकारिता लोकतंत्र की वास्तविक चेतना
राज्यपाल ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता सत्य, विवेक और मूल्यों के साथ सत्ता से प्रश्न पूछती है और जनहित को केंद्र में रखती है—यही लोकतंत्र की वास्तविक चेतना है। स्वतंत्रता को उन्होंने केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि सभ्यता के पुनर्जागरण और नवभारत के निर्माण का संकल्प बताया।
डिजिटल युग में भी अपरिवर्तित धर्म डिजिटल युग में मीडिया के स्वरूप में तीव्र परिवर्तन का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि पत्रकारिता का मूल धर्म अपरिवर्तित रहना चाहिए। हिंदी पत्रकारिता ने हमेशा वंचित वर्गों की आवाज बनने, नारी सम्मान की संवाहक और सामाजिक सुधार की अग्रदूत की भूमिका निभाई है।
हरिद्वार: चेतना का केंद्र
हरिद्वार की आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह नगर केवल तीर्थ नहीं, बल्कि भारत की चेतना का केंद्र है। वर्ष 2025 में हरिद्वार में आए करोड़ों पर्यटकों का उल्लेख करते हुए उन्होंने पत्रकारों से सकारात्मक और राष्ट्रनिर्माण का संदेश व्यापक स्तर तक पहुँचाने का आह्वान किया। राज्यपाल ने मीडिया से शहर की सफाई व्यवस्था के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाने का आग्रह किया, ताकि सामाजिक सहभागिता के माध्यम से स्वच्छ और सुंदर हरिद्वार का निर्माण हो सके।
पत्रकारों से उन्होंने जनहित, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्र पुनर्निर्माण के प्रति अपने दायित्व को संकल्प के रूप में स्वीकार करने का आग्रह किया और भारत को 2047 तक विकसित, आत्मनिर्भर और विश्व गुरु बनाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा। मुख्य वक्ता निर्मल पाठक ने आजादी के बाद राष्ट्र पुनर्निर्माण में हिंदी पत्रकारिता विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए पत्रकारिता की ऐतिहासिक जिम्मेदारियों और समकालीन चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में अध्यक्ष प्रेस क्लब हरिद्वार धर्मेन्द्र चौधरी, मुख्य संयोजक सुनील पाण्डेय, संयोजक संजय आर्य, संयोजक डॉ. प्रदीप जोशी, कोष सचिव काशीराम सैनी, सांस्कृतिक सचिव आशु शर्मा, महामंत्री दीपक मिश्रा सहित संयोजक समिति के सदस्य और अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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