Home Uttarakhand Dehradun जौनसारियों को जनजाति प्रमाणपत्र देने पर लगे रोक : विकेश

जौनसारियों को जनजाति प्रमाणपत्र देने पर लगे रोक : विकेश

Halt the issuance of tribal certificates to Jaunsaris

देहरादून। Halt the issuance of tribal certificates to Jaunsaris उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जन्नासरी के स्थान पर जौनसारी शब्द संशोधित कराने के लिए केंद्र सरकार को संस्तुति करने का फैसला किया गया है। इस फैसले के बाद इस मुद्दे का प्रमुखता से उठाने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश नेगी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और देहरादून जिला प्रशासन से मांग की है कि जब तक इस मामले में केंद्र से फैसला नहीं होता तब तक जौनसार के किसी भी अगड़ी जाति के लोगों को अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र जारी न किया जाएं। विकेश सिंह नेगी ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के गलत फैसले से हजारों अपात्र लोगों ने अनुसूचित जनजाति आरक्षण का लाभ लिया है और वहीं जौनसार का वंचित समाज जिनको इसका लाभ मिलना चाहिए था आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसो दूर है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश नेगी का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने इस मामले में जो संस्तुति करने का फैसला लिया है, उससे स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार मानती है कि जौनसार में अनुसूचित जनजाति के आरक्षण के मामले में गलती हो रही है। कोल्टा और बाजगी समुदाय के हकों पर जौनसार के अपात्र ब्राह्मण और क्षत्रिय आरक्षण का लाभ ले रहे हैं और वहां के कोल्टा और बाजगी जातियों के लोग आज भी अभावग्रस्त जीवन जी रहे हैं। प्रदेश सरकार के इस फैसले के बाद स्थिति साफ हो गयी है कि जौनसार में 28 नवम्बर 2000 के बाद जितने भी अनुसूचित जनजाति के प्रमाणपत्र जारी किये गये हैं, वो पूरी तरह से अवैध हैं।

साथ ही नेगी ने कहा कि जिला प्रशासन को तत्काल प्रभाव से जौनसार के ब्राह्मण, खस और क्षत्रियों को अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र निरस्त कर देना चाहिए। इसके साथ ही जब तक केन्द्र सरकार इस पर कोई ठोस फैसला नहीं लेता है तब तक राज्य के जौनसार क्षेत्र में कोई नया प्रमाणपत्र निर्गत नहीं किया जाना चाहिए।

साथ ही नेगी ने कहा कि 1967 में राष्ट्रपति के अध्यादेश और लोकुर-डेबुर कमेटी की रिपोर्ट में भी स्पष्ट कहा गया है कि जौनसार में क्षेत्र विशेष नहीं बल्कि समुदाय के आधार पर जनजाति का आरक्षण दिया गया है। इसमें साफ कहा गया है कि जौनसार के ब्राह्मणों, क्षत्रियों और खस को अनुसूचित जनजाति का लाभ नहीं दिया जा सकता है। गौरतलब है कि एडवोकेट विकेश नेगी इस मुद्दे को सरकार से लगातार उठा रहे हैं। यह मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है और हाईकोर्ट ने सरकार से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है।

इस दौरान विकेश नेगी का कहना है कि यह मामला संसद में निहित है और बिना संसद में प्रस्ताव लाए इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्र इस संस्तुति पर कोई फैसला नहीं लेता है तो सरकार को जौनसारियों को एसटी प्रमाणपत्र जारी नहीं करने चाहिए। एडवोकेट नेगी ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वो इस मामले में अदालत की शरण लेंगे।

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