देश प्यार और मोहब्बत से चलेगा, नफरत से नहीं : मदनी

country will run on love and affection

पीरान कलियर/हरिद्वार। country will run on love and affection देश में बढ़ती नफरत की राजनीति, मदरसों और मस्जिदों पर हो रही बुल्डोजर कार्रवाई तथा मुसलमानों के खिलाफ बनाए जा रहे माहौल पर जमीअत उलेमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने तीखा और बेबाक हमला बोला। उन्होंने कहा कि ‘कोई भी मुल्क नफरत से लंबे समय तक नहीं चल सकता।

देश प्यार, मोहब्बत और इंसाफ से चलता है, नफरत से नहीं। सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन हमेशा रहने वाली हुकूमत सिर्फ अल्लाह, ओम और गॉड की है।’ मंगलवार देर रात पीरान कलियर शरीफ में आयोजित जमीयत उलेमा उत्तराखंड के प्रदेश कार्यकारिणी अधिवेशन को संबोधित करते हुए मौलाना मदनी ने देश के मौजूदा हालात पर खुलकर अपनी बात रखी। अधिवेशन में प्रदेश भर से हजारों उलेमा, सामाजिक कार्यकर्ता और जमीयत के पदाधिकारी मौजूद रहे।

मौलाना मदनी ने कहा कि जमीअत उलेमा-ए-हिन्द सिर्फ एक संगठन नहीं बल्कि देश की आजादी की लड़ाई का सुनहरा इतिहास है। उन्होंने कहा कि हमारे बुजुर्गों और उलेमा ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपनी जानों की कुर्बानी दी, वर्षों जेलों में रहे, फांसी के फंदों को चूमा, लेकिन कभी माफी नहीं मांगी। उन्होंने कहा कि शेखुल हिन्द मौलाना महमूदुल हसन ने अंग्रेजी गुलामी को हराम करार दिया था और कहा था कि वह उस देश में दफन होना भी पसंद नहीं करेंगे जहां अंग्रेजों का शासन हो।

मदनी ने सवाल उठाते हुए कहा, जिन मदरसों से आजादी की चिंगारी निकली, जिन मस्जिदों और उलेमा ने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन खड़ा किया, आज उन्हीं मदरसों और मस्जिदों को बुल्डोजर से गिराया जा रहा है। क्या यही हमारे बुजुर्गों की कुर्बानियों का सिला है?

अपने संबोधन में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में मुस्लिम उलेमा और जमीअत की भूमिका का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 1857 की क्रांति से लेकर आजादी तक उलेमा ने सबसे आगे रहकर संघर्ष किया। मदनी ने कहा कि आज कुछ लोग मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि इतिहास गवाह है कि आजादी के लिए सबसे ज्यादा कुर्बानियां उलेमा और मुस्लिम समाज ने दी हैं। उन्होंने कहा,जो लोग आज हमें गद्दार कहते हैं, उन्हें पहले अपने इतिहास को देखना चाहिए। हमारे बुजुर्गों ने जेलें काटीं, फांसी के फंदे चूमे, लेकिन कभी अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके।

मौलाना मदनी ने देश के विभिन्न राज्यों में मदरसों, मस्जिदों और धार्मिक स्थलों पर चल रही बुल्डोजर कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि यह संविधान और न्याय की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों ने देश को आजादी दिलाने और समाज को शिक्षा देने में भूमिका निभाई, आज उन्हीं को निशाना बनाया जा रहा है।

मदनी ने कहा कि आज देश में नफरत की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कोई भी घर नफरत से नहीं चल सकता, तो फिर इतना बड़ा देश कैसे चल सकता है। उन्होंने कहा, हिंदुस्तान की पहचान गंगा-जमुनी तहजीब है। यहां प्यार, भाईचारा और इंसानियत की परंपरा रही है। अगर नफरत का जहर फैलाया जाएगा तो इसका नुकसान पूरे देश को होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि आज मुसलमानों का नाम लेना भी कुछ लोगों को नागवार गुजरता है और ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जिससे समाज में भय और अविश्वास पैदा हो रहा है।

अपने संबोधन के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से में मौलाना मदनी ने हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया। उन्होंने कहा, सरकारें और राजनीतिक दल अपना काम करते रहेंगे, लेकिन आम हिंदू और मुसलमानों की जिम्मेदारी है कि वे एक-दूसरे से मोहब्बत करें। नफरत का जवाब नफरत से नहीं, मोहब्बत से दिया जाना चाहिए। उन्होंने मौजूद हजारों लोगों से हाथ उठवाकर संकल्प दिलाया कि वे अपने हिंदू भाइयों के साथ प्रेम, सम्मान और भाईचारे का व्यवहार करेंगे तथा समाज में सद्भाव को मजबूत करेंगे।

मदनी ने दिल्ली में हुए अग्निकांड सहित कई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मुश्किल परिस्थितियों में मुस्लिम समाज ने हमेशा इंसानियत और भाईचारे की मिसाल पेश की है। उन्होंने कहा कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है और इसी रास्ते पर चलकर देश को मजबूत बनाया जा सकता है।

  • जमीयत उलेमा उत्तराखंड के प्रदेश कार्यकारिणी अधिवेशन में संगठनात्मक और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किए गए।
  • शिक्षा के प्रसार हेतु कोचिंग सेंटरों की स्थापना। मदरसों के आधुनिकीकरण एवं संरक्षण का संकल्प।
  • मस्जिदों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग। वक्फ संपत्तियों के संरक्षण और अवैध कब्जों से मुक्ति का प्रस्ताव। पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण अभियान को बढ़ावा देने का निर्णय। सामाजिक सौहार्द और हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया गया।
  • अधिवेशन में विभिन्न मदरसों से आलिमियत की शिक्षा पूर्ण करने वाले छात्रों को सम्मानित किया गया। उलेमा ने उन्हें समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया।

प्रदेश कार्यकारिणी अधिवेशन केवल संगठनात्मक बैठक नहीं बल्कि देश में बढ़ती सामाजिक दूरियों के बीच भाईचारे, इंसाफ और संवैधानिक मूल्यों की पैरवी का मंच बनकर उभरा। मौलाना अरशद मदनी के संबोधन ने जहां सरकार की नीतियों और नफरत की राजनीति पर तीखे सवाल खड़े किए, वहीं हिंदू-मुस्लिम एकता, प्रेम और सामाजिक सद्भाव का मजबूत संदेश भी दिया।

पीरान कलियर की धरती से उठी यह आवाज अब राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनने की ओर बढ़ रही है, जहां एक तरफ सत्ता और सियासत है, तो दूसरी तरफ मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम। इस मौक़े पर प्रदेश अध्यक्ष मौलाना हुसैन अहमद क़ासमी, प्रदेश महासचिव मौलाना शराफत अली क़ासमी, प्रदेश उपाध्यक्ष मुफ्ती इकराम, मौलाना अब्दुल रज्जाक, हरिद्वार जिला अध्यक्ष मौलाना अब्दुल वाहिद, देहरादून जिला अध्यक्ष मौलाना अब्दुल मन्नान क़ासमी, उधम सिंह नगर जिला अध्यक्ष मौलाना जियाउर रहमान, नैनीताल जिला अध्यक्ष मौलाना मुकीम, प्रदेश मीडिया प्रभारी मोहम्मद शाह नज़र, कारी एहतिशाम निजमी व मुफ्ती ताजीम आदि मौजूद रहे।

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