भाग्यशाली हैं वे मनुष्य जिन्हें सद्गुरु की कृपा प्राप्त होती : हरभजन सिंह

God Grace
निरंकारी मिशन के सत्संग कार्यक्रम में प्रवचन करते हरभजन सिंह।
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देहरादून। God Grace संत निरंकारी मण्डल के तत्वावधान में आयोजित रविवारीय सत्संग कार्यक्रम में पधारे श्रद्धालु भक्तों को सद्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज का पावन सन्देश देते हुये मसूरी जोन के जोनल इंचार्ज हरभजन सिंह ने कहा कि सद्गुरु सदैव निराकार, प्रभु, परमात्मा का साकार रूप होता है ईश्वर स्वयं सद्गुरु के घट में प्रकट होता है।

ब्रह्मा, विष्णु, महेश की भाँति सद्गुरु के पास तमाम दिव्य गुण, दिव्य शक्तियां आ जाती हैं जिन्हें वे सृष्टि के कल्याण के लिए प्रयोग करते है। उन्होंने कहा कि हम भाग्यशाली हैं कि सद्गुरु की कृपा से हमें सदा ही निराकार एवं साकार दोनों रूपों का दर्शन अंग-संग होता है। संत निरंकारी मिशन में सद्गुरु शरीर रूप में निराकार प्रभु परमात्मा का ही स्वरूप है।

अतः इसके दोनों ही रूप हैं दोनों ही पहचान हैं। जब हम सद्गुरु को उसके निराकार रूप में याद करते हैं तो सद्गुरु और निराकार परमात्मा में कोई अन्तर, कोई भेद नहीं होता। एक के प्रति की जाने वाली प्रार्थना दूसरे तक स्वयं पहुँच रही होती है इस प्रार्थना को दोनों ही सुनते हैं।

भूले भटके लोग जो केवल शरीर के बल पर ही जीते हैं और शरीर के ही सुखों को जीवन जीने का उद्देश्य मानते हैं, सत्य के मार्ग को भूलकर सांसारिक पदार्थों के माया जाल में फंसे रहते हैं, उनका मार्गदर्शन एवं उद्धार करता है। जब हम सद्गुरु से साकार रूप में मिलते हैं तो वह निराकार ईश्वर का ही प्रतिनिधित्व करता है।

सद्गुरु शरीर में रहते हुए भी केवल शरीर का नाम नहीं

वास्तव में निराकार ईश्वर ही सद्गुरु के घट में बैठकर कार्य करता है। अतः यहां सद्गुरु शरीर में रहते हुए भी केवल शरीर का नाम नहीं। निराकार के बिना तो वह हमारे जैसा एक साधारण व्यक्ति कहलाएगा। इसीलिए सद्गुरु की पहचान निराकार से ही है जो उसके घट में बैठकर अपना काम करता है।

सद्गुरु के हर कार्य में निराकार प्रभु परमात्मा शामिल होता है। अतः सद्गुरु संसार के अन्य नागरिकों की भाँति कोई साधारण व्यक्ति नहीं। वह संसार के सभी जाति-धर्म, नसल, भाषा एवं संस्कृति से ऊपर होता है, ऐसे सभी बन्धनों से मुक्त होता है।

उन्होंने कहा कि संत निरंकारी मिशन 71वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का आयोजन दिनांक 24, 25 व 26 नवम्बर, 2018 को समालखा हरियाणा में होने जा रहा है इस समागम में भारत व विश्व से लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने की सम्भावना है।

समागम स्थल पर सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा

यह समागम स्थल लगभग 600 एकड़ भूमि में फैला हुआ है। यहां बाहर से आने वाले सभी भक्त समागम का भरपूर आनन्द ले सकें और ठहरने तथा भोजन इत्यादि में भी कोई असुविधा न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। बिजली, पानी, सीवरेज इत्यादि के प्रबन्ध के लिए सम्बन्धित अधिकारियों से सहयोग लिया जा रहा है और मिल भी रहा है।

समागम स्थल पर सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यहाँ तक कि लंगर पत्तलों की बजाय स्टील की थालियों में दिया जाएगा। लंगर, केंटीनों, प्याऊ और शौचालय इत्यादि स्थानों पर स्वच्छता पर विशेष बल दिया जाएगा। बसों व अन्य आने वाले साधनों की पार्किंग व्यवस्था भी सुचारू की जाएगी।

इसी प्रकार दिव्यांगों के लिए भी विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सत्संग समापन से पूर्व अनेकों प्रभु-प्रेमियों, भाई-बहनों एवं नन्हे-मुन्ने बच्चों ने गीतो एवं प्रवचनों के माध्यम से निरंकारी माता सुदीक्षा जी महाराज की कृपाओ का व्याख्यान कर संगत को निहाल किया। मंच का संचालन स्याण जी ने किया।

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